Tuesday, December 2, 2008

वाणी वंदना




वाणी वंदना



सत् कर्म जीवन में पले
अम्लानपथ मानव चले
भवभाव को विस्तार दे
हे अम्ब शारदे सार दे

सम-भाव के सूरज तले
वैषम्यका हिमनग गले
तू शिवम् का उपहार दे
हे अम्ब शारदे सार दे

सत्य का दीपक जले
अनय की संध्या टले
पंक जलनिधि तार दे
हे अम्बशारदे सार दे

हिंस्रभीहों मानव भले
विद्रूपता करतल मले
चारित्र्य का संसार दे
हे अम्ब शारदे सार दे

परपीर कंटक सी खले
कटुता घटे समता पले
ममतामयी तू प्यार दे
हे अम्ब शारदे तार दे

7 comments:

विजय ठाकुर said...

अम्ब शारदे आपकी प्रार्थना स्वीकार करें

!!अक्षय-मन!! said...

aapko naman karta huin...
aisi sadbudhi aisi vandana har kisi ke mann mai ho....

shama said...

Aapki dua qubool ho...! Dili chahat hai...shubhkamnayon sahit swagat hai...mre blogpe kuchh samayik likha hai, amantrit karti hun...zaroor aayen..

श्यामल सुमन said...

सुन्दर प्रस्तुति। चलिए मैं भी कुछ इसी तर्ज पर जोड़ दूँ।

नित प्रेम की छाया तले।
बस ज्ञान का दीपक जले।
तू जग को यह उपहार दे।
हे अम्ब शारदे सार दे।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

रश्मि प्रभा... said...

maa shaarde ki utkrisht prarthna.......

दिगम्बर नासवा said...

सत्य का दीपक जले
अनय की संध्या टले
पंक जलनिधि तार दे
हे अम्बशारदे सार दे।

सारगर्भित रचना
बधाई

संत शर्मा said...

Maa Saraswati ki ek utkristh stutti. Behad khubsurat.