तमसो मा ज्योतिर्गमय
आभा (मुक्तिबोध साहित्य सरणी पाथाखेडा जिला बेतुल मध्यप्रदेश ) में प्रकाशित (मार्च -1998)
हे सौम्य !
संवेदना के स्वरुप,
करुणा के आगार,
तुम तो
मानवता के उपासक थे
पर;
ये कैसी विकृति!
तव समष्टि चेतना
न जाने कब
निपट वैयक्तिक बनी,
तच्छाया में तुमने;
शाश्वत मूल्यों से ले विराग
लोक-मंगल का किया त्याग,
छल-छद्म -अहं की खेल फाग
कुल की शुचिता को दिया दाग!
सब अर्थ-अनर्थ रच डाला
औ'वन्द्य निन्द्य कर डाला।
ओ हरिण्यकशिपु तव अंहकार
सम्पूर्ण धरा का बना भार
सत्य छोड़ भर चित प्रमाद
आनंदशून्य ओढा़ विषाद
था अनन्य नहिं निर्मोही
बन गया अचानक हरिद्रोही
कदाचारयुत तव उन्माद
नहीं सह सका था प्रहलाद।
फिर भी सुत ने की आर्त पुकार
त्यागिये तात ये वामाचार
सुन ये वचन हुआ नृप काल
यत्न किया वध का तत्काल
यों पिता पुत्र का शत्रु बना
अज्ञान तमस था घना- घना
बड़ा किया प्यार से पाल
होली को सौंपा सो लाल
कुल- कलंक को गोद धरो
सत्वर ही अग्नि प्रवेश करो
यों भगिनी को आदेश दिया
तब उसने बालक गोद लिया।
होली मन अन्तर्द्वन्द्व बड़ा
क्या करे नहीं कुछ सूझ पड़ा
इत वत्सलता उत राजधर्म
यों उसका आहत हुआ मर्म
था अन्धकार सर्वत्र वहाँ
नहिं किंचित भी आलोक तहाँ
मानव- मानव को घाल रहा
आपस में कटुता पाल रहा
होना था कोई अति विशेष
जागी आशा की एक रेख
बच जाए आँखों का तारा
मानव हो मानव को प्यारा।
मानवता की जलती मशाल
नृप भगिनी ने थामी तत्काल
अक्षय चादर होलिके अंक
नहिं दहनकर सके पावक रंक
इत अग्नि समाधि लेन धाई
उत घनीभूत उर ममता छाई
माते ने ठाना दृढ़ निश्चय
सुत पर डाली चादर अक्षय
ममता की शीतल छाँह घनी
वो चादर कवच अभेद बनी
यों समिधा बनकर हुयी भस्म
बच गया पुत्र कैसा तिलस्म
यों उसका यज्ञ हुआ पावन
निष्कलुष हुआ ऐसे दामन।
होली का ऐसा रहा उत्स
नत मस्तक है प्रहलाद वत्स
देवी ने त्याग किया जैसा
अन्यत्र प्रमाण नहीं ऐसा
हे आदिशक्ति महिमा अनूप
माते! हैं तेरे विविध रूप
ममतामय मुझको मिला अंक
जन्मों- जन्मों का धुला पंक
प्रहलाद कर रहा यों वंदन
माँ पद रज मम मस्तक चंदन
है जग में तव महिमा अक्षय
हे मातु तुम्हारी जय जय जय !
नृप की पूरी नहिं हुयी चाह
जग को तुमने दी नई राह
मिट गया तमस आया विहान
खग- कुल ने गया मधुर गान
अनंत दुखों का हुआ अंत
आईं खुशियाँ छाया वसंत
खिल रहे पुष्प हैं डाल- डाल
हो गई निखिल जगती निहाल
इत कुंकुम है उत से गुलाल
आमोद मानते वृद्ध- बाल
इत रंग चला उत पिचकारी
आनंद-मग्न सब नर-नारी।

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