Saturday, November 29, 2008

समझौता



समझौता


सब
कुछ ठीक ठाक होने के बाद
उधर से एक नाग चला
और इधर से बिल
जो नाग चला वो नाग नहीं
किसी महापुरुष का आदेश है
जो चला जा रहा है बिल की ओर
बिल बढ़ा रहा है नाग की ओर
अर्थात ;
आदेश चला जा रहा है
बिल की ओर और
बिल चला रहा है
आदेश की ओर


वैसे तो बिल की प्रकृति है
कि धरती से जुड़ा रहे पर ;
आज उसने इसका
अतिक्रमण कर दिया है

और धरती से उखड़कर
उस ओर चल दिया है
जिस ओर नाग

दोनों मिलते हैं परस्पर
नाग बिल में प्रवेश
करने का प्रयास करता है
बिल वर्जना करता है
रोक देता है तुरन्त
कहता है ठहरो

हम दोनों के मध्य
एक समझौता हुआ है
क्या भूल गए ?
यह समझौता केवल
समझौता ही नहीं
बल्कि ;
साक्ष्य है निराकार
परमात्मा-सा जो
हमारे बीच समाया हुआ है
क्या भूल गए

जब तक यह पूर्ण नहीं होगा
तब तक तुम मेरा
स्पर्श तक नहीं कर सकते
अर्थात
मुझमें प्रवेश नहीं कर सकते

कौन-सा समझौता ?
क्या स्मरण नहीं दिलाओगे ?
बिल तपाक से बोल पड़ा
इतना भी नहीं जानते
तुम मुझसे पहले चले थे
थोड़ा सा पहले ;
इसलिए अवस्था में बड़े हो
तुम्हारे बाद मैंने
यात्रा शुरू की थी
इसलिए मैं छोटा हूँ
दोनों एक साथ चले होते
तो बराबर के होते अर्थात
होते हम फिफ्टी-फिफ्टी के

पर तुम जितने कुछ बड़े हो
उतना ही कुछ मैं छोटा हूँ
इसलिए फिफ्टी-फिफ्टी का नहीं
समझौता है सिक्सटी -फोर्टी का
याद आया !
यही
समझौता जो
कभी हमारे बीच हुआ था
और आज भी है

मुझे अटल विश्वास है
की आगे भी रहेगा
यही हमारे सहअस्तित्व का रक्षक है
और
व्याप्त है पत्रावलियों में
निराकार परमात्मा- सा
यदि तुम चले होते
तो मैं नहीं होता और अब
मैं साथ दूँ तो तुम्हारा
अस्तित्व ही मिट जाएगा।

इसलिए
हम और तुम ,
तुम और हम
परस्पर पूरक बने
और मिलकर आगे बढ़ें
दोनों मिल सिक्सटी -फोर्टी का
हिसाब लेते रहें- देते रहें

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