माँ
आभा (मुक्तिबोध साहित्य सरणी पाथाखेडा जिला बेतुल मध्यप्रदेश ) में प्रकाशित (दिसम्बर 1998)
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
अवनि अम्बर में सृजन का
जननि मूलाधार बनती
सृष्टि की नव सर्जना में
कृष्टि के माँ रंग भरती
व्यष्टि के मोती संजोये
जगत का कल्याण हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
जीव जड़- चेतन जहाँ तक
जननि मिलती हर किसी को
पुण्य संचय फलित जिसका
माँ मिली है बस उसी को
ममतामयी जो माँ सदा वो
मनुज का उत्थान हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
विष्णु शिव अज अंजनीसुत
व्यास लवकुश औ' षडानन
भरत गंगापुत्र पांडव
कृष्ण गौतम औ' गजानन
इन सभी की कीर्ति हो माँ
सुयश औ' अवदान हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
जननि ममता वृष्टि कर दे
मातु समता दृष्टि भर दे
सदयहो जग नया स्वर दे
भेद भूलें यही वर दे
मंदिरों की आरती हो
मस्जिद-ऐ-अजान हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
आभा (मुक्तिबोध साहित्य सरणी पाथाखेडा जिला बेतुल मध्यप्रदेश ) में प्रकाशित (दिसम्बर 1998)
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
अवनि अम्बर में सृजन का
जननि मूलाधार बनती
सृष्टि की नव सर्जना में
कृष्टि के माँ रंग भरती
व्यष्टि के मोती संजोये
जगत का कल्याण हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
जीव जड़- चेतन जहाँ तक
जननि मिलती हर किसी को
पुण्य संचय फलित जिसका
माँ मिली है बस उसी को
ममतामयी जो माँ सदा वो
मनुज का उत्थान हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
विष्णु शिव अज अंजनीसुत
भरत गंगापुत्र पांडव
कृष्ण गौतम औ' गजानन
इन सभी की कीर्ति हो माँ
सुयश औ' अवदान हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !
जननि ममता वृष्टि कर दे
मातु समता दृष्टि भर दे
सदयहो जग नया स्वर दे
भेद भूलें यही वर दे
मंदिरों की आरती हो
मस्जिद-ऐ-अजान हो तुम
हे जननि मम प्राण हो तुम
और माँ वरदान हो तुम !

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