Friday, November 28, 2008

नगाड़ा

नगाड़ा
एक ज़माने में
नारी को
किसी अभद्र ने
अबला कह दिया था
वास्तव में शक्तिपुंज है जो;
वह नारी
अबला नहीं हो सकती
जो अबला समझ
अपमानित करना चाहते हैं
वास्तव में
वे भीषण विपदा को गले लगाते हैं

ऐसा अपमान चुनौती है नारी का
जिसका सामना करने को तत्पर हो
आज की नारी !
जो कभी देवी कहलाती थी
आज भी देवी है और
जो कभी सबला कहलाती थी
आज भी सबला है

यदि तेरी अस्मिता पर किसी ने
प्रश्नचिह्न लगाया और
तेरी गरिमा को कलुषित बनाया
तो तू जाग और
स्वत्व की पहचान कर ले
निज शक्ति का अहसास भर ले

फिर निज प्राण-त्राण हित
पदात्रण को
शास्त्रवत तू हस्तगत कर
कूच कर तू उस दिशा में
जिधर से आवाज आयी
खोज कर उस कटु वदन की
जिसने थी जिह्वा चलायी

लगा उस आवाज से था -
फुसकार विषधर ने लगायी
साथ ही
यों जीभ उसने लपलपायी
चाहता था हड़प जाना
जो तेरी पहचान को
चाहता था चाट जाना तव
अस्मिता -अभिमान को

बैठना तुझको नहीं है हारकर
शास्त्र थामे हाथ में तू वारकर
अन्यथा अवसर को पाकर
वही चेहरा सामने फिर आयेगा
और विषाक्त जीभ
फिर लापलापायेगा

क्या सह सकेगी यह
शायद नहीं !
तो अनुकूल अवसर है यही '
कदम यदि आगे बढाया
जीत तेरी है सुनिश्चित
अदम्य साहस पा सकेगी
जो आज नारी जाति चिंतित

चोट कर निज शस्त्र से उस शक्ल पर
बदल दे तू शक्ल उसकी /अक्ल उसकी
शस्त्र का प्रहार
शक्ल सह सकेगी
अन्यथा क्या ठिकाने
अक्ल उसकी रह सकेगी

शस्त्र -शक्ल संघात
जब होगा बराबर
शक्ति तेरी को तभी
पहचान पायेगा चराचर
चोट देखेगा जहां यों
शक्ल पर होती ठनाठन
ज्यों चोब पड़ती हो
नगाडे पर दनादन

लोग देखेंगे कहेंगे
पिट रहा ये क्यों धमाधम
कुछ कहेंगे नर नहीं ये तो
निपट निकला नराधम
कुछ कहेंगे क्षोभ से
पिटता विचारा
कुछ कहेंगे रोब से
बजता
नगाड़ा

संतुष्ट इतने से अगर तो
तुरत पीछे लौट आना
अन्यथा तत्काल अपना
कदम तू आगे बढ़ाना
पाँव में तू पहन ले
जो शस्त्र थामा हाथ में
करवाल कर में थामकर
दे बलि चढा इक साथ में।

जब सिद्ध कर देगी कि
तू तो शक्ति का आगार है
नम जायेगा नर लोक तब
जिसका पिशाची आधार है
शस्त्र जब कोई सँभाले
त्राण दुनिया मागती है
शक्ति से ही भक्ति एवं
प्रीति भय से जागती है
संघर्ष अभी भी शेष है/
संघर्ष अभी विशेष है
नहिं हारना हिम्मत कहीं
तू दिखा दे अधम नर को
शक्ति हूँ अबला नहीं ।











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